प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उनके राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान, शिक्षा सुधारों, औद्योगिक विकास और अखंड भारत के संकल्प को याद करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन देश की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपने लेख में कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद, जनसेवा और राष्ट्रीय एकता में विश्वास रखने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत की अखंडता की रक्षा करना था। देशहित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए, जिनकी प्रेरणा आज भी देशवासियों को मिलती है। पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि प्रसिद्ध शिक्षाविद सर आशुतोष मुखर्जी के पुत्र होने के बावजूद डॉ. मुखर्जी ने आरामदायक जीवन का रास्ता छोड़कर राष्ट्रसेवा को चुना। उन्होंने युवाओं के लिए डॉ. मुखर्जी के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जो भी कार्य करें, उसे पूरी निष्ठा, गंभीरता और समर्पण के साथ करें। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उन्हें देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रखर पुरोधा बताते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक के रूप में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। शाह ने कहा कि राष्ट्रहित के लिए डॉ. मुखर्जी का संघर्ष और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।