राजधानी दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों के बीच रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) निजी स्कूलों के लिए फीस बढ़ोतरी से जुड़ी पूरी जानकारी शिक्षा निदेशालय (DoE) को देना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद फीस निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है। शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी नए सर्कुलर के अनुसार, स्कूलों को अब नए प्रारूप में फीस से जुड़ी जानकारी के साथ शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का विवरण, स्वीकृत और भरे हुए पदों की संख्या, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, छात्र-शिक्षक अनुपात, कक्षा-वार नामांकन, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत दाखिलों का रिकॉर्ड और स्कूल के बुनियादी ढांचे से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा ट्यूशन फीस, अन्य शुल्क, वित्तीय खातों और सरकारी नियमों के अनुपालन का पूरा ब्यौरा भी देना होगा। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल 18 तय मानकों के आधार पर उचित कारण बताए बिना फीस नहीं बढ़ा सकेगा। स्कूलों को यह साबित करना होगा कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि बुनियादी ढांचे के विकास, सुरक्षा, परिवहन, भवन रखरखाव, प्रकाश व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए जरूरी है। इसके समर्थन में वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। सरकार ने सभी निजी स्कूलों को 15 जुलाई तक दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) का गठन करने का निर्देश दिया है। शिक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा तक नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।