बेंगलुरु स्थित अजमेरा ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीड़ित निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। विशेष पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत ने 8.41 करोड़ रुपये मूल्य की अटैच संपत्तियां उनके वैध दावेदारों और निवेशकों को वापस करने का आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने कंपनी में निवेश कर अपनी जमा पूंजी गंवाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि अजमेरा ग्रुप ने आम लोगों को अधिक रिटर्न का लालच देकर निवेश जुटाया, लेकिन बाद में न तो उन्हें कोई लाभ दिया गया और न ही उनकी मूल राशि लौटाई गई। ईडी की जांच में यह भी पता चला कि निवेशकों से प्राप्त रकम को कंपनी के प्रबंध निदेशक, निदेशकों और उनसे जुड़े अन्य लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इस धन का इस्तेमाल कई चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया था। मामले की जांच के दौरान ईडी ने इन संपत्तियों को अटैच कर विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। पीड़ितों को उनका हक दिलाने के उद्देश्य से ईडी ने संपत्तियों की वापसी पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत ने 9 जून 2026 को आदेश जारी करते हुए 8.41 करोड़ रुपये मूल्य की अटैच संपत्तियां पीड़ित निवेशकों और अन्य वैध दावेदारों को लौटाने की अनुमति प्रदान कर दी। इस फैसले को निवेशकों के लिए बड़ी राहत और न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।