अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर अब पूरी तरह खत्म माना जा रहा है और सैन्य कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है और फिलहाल किसी नए समझौते की संभावना नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को निशाना बनाना जारी रखता है, तो अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि मौजूदा एयरस्ट्राइक जहाजों पर हुए हमलों का सीधा जवाब हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह ईरान के "नंबर वन टारगेट" बने हुए हैं। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर के अनुसार अमेरिकी हमलों में अब तक 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 47 घायलों का इलाज अभी भी अस्पतालों में चल रहा है। दूसरी ओर, CENTCOM ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। इस बीच क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है। इन घटनाओं के बीच मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।