पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। ताजा घटनाक्रम में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान से आजादी की मांग को और तेज करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, पीओके के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पर तीखे आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इन सभी को कड़ा विरोध जताते हुए “आतंकी” तक करार दिया। अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में अब क्षेत्रीय समर्थन भी बढ़ने की बात सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि जम्मू, गिलगित-बाल्टिस्तान और लद्दाख से भी प्रदर्शनकारियों को समर्थन मिल रहा है, जिससे आंदोलन और व्यापक होता दिख रहा है। पिछले मंगलवार से जारी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक लगभग 53 लोगों की मौत की सूचना है, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान की सरकार और सेना के खिलाफ भारी नारेबाजी की जा रही है। कई स्थानों पर लोगों का गुस्सा खुले विद्रोह में बदलता दिखाई दे रहा है। हालांकि आंदोलन के नेतृत्व में भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कुछ नेता जैसे सरदार अमान खान और ख्वाजा मेहरान स्वतंत्रता और पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कर रहे हैं, जबकि उमर नजीर और शौकत नवाज मीर बातचीत और समझौते के पक्ष में बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में पीओके की 12 कथित शरणार्थी सीटों को समाप्त करना और निर्वाचित नेताओं के शपथ ग्रहण से जुड़ी वफादारी की शर्तों में बदलाव शामिल है। स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रदर्शनकारी रावलाकोट में डटे हुए हैं।