देश में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के बाद अब घरेलू खाना पकाने के लिए भी एथेनॉल को ईंधन के रूप में अपनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य रसोई गैस (एलपीजी) पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और ईंधन आयात पर होने वाले खर्च को घटाना है। प्रस्तावित नीति के तहत एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव को घरेलू उपयोग के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है। सरकार इस योजना के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है, जिसमें सुरक्षा मानक, आपूर्ति व्यवस्था, लागत और उपभोक्ताओं को मिलने वाली संभावित सब्सिडी भी शामिल है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है, तो लोगों को एलपीजी के साथ एक स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन का विकल्प उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल का उपयोग बढ़ने से किसानों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि आधारित स्रोतों से होता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। सरकार पहले ही एथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव का परीक्षण कर चुकी है और अब व्यापक स्तर पर नीति तैयार करने की दिशा में काम जारी है। यदि यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में भारतीय रसोई में स्वच्छ ईंधन के रूप में एथेनॉल एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।