मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका इसका जवाब बेहद सख्त तरीके से देगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में ईरान के महत्वपूर्ण पुलों, बिजलीघरों और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजधानी तेहरान के आसपास मौजूद अहम ठिकाने भी कार्रवाई से अछूते नहीं रहेंगे। इस बयान के बीच अमेरिका ने ईरान के कई शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। इन हमलों में चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह जैसे शहर प्रभावित हुए। सीजफायर टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। उधर, क्षेत्रीय तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे कुछ तेल टैंकरों ने सुरक्षा कारणों से अपना मार्ग बदल लिया। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच अमेरिका ने स्वीकार किया कि हालिया ईरानी हमलों में लगभग 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, हालांकि अधिकांश सैनिक इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं। दूसरी ओर, कतर ने हालिया हमलों से हुए नुकसान के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की मांग की है। वहीं, ईरान के गृह मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा कर वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी नए घटनाक्रम का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।