मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आराध्य का आशीर्वाद लिया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में घड़ी की सुई ने जैसे ही 11 बजाए श्रीगणेश, नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन होगा। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो गए। इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया।इ स दौरान जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। जन्म के बाद कान्हा की आरती की गई।
घड़ी की सुई ने जैसे ही 11 बजाए श्रीगणेश, नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन होगा। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो जाएंगे। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया।
जन्माष्टमी पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। जन्मभूमि परिसर के लीलामंच पर कलाकार प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ माैके पर जुटी है।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी देख कर अगर आप नंदगांव नहीं पहुंचे तो मानिए कृष्ण जन्म की आधी लीलाएं ही देखीं। क्योंकि मथुरा में जहां आधी रात कन्हैया के जन्म का उल्लास छाता है, वहीं नंदगांव में अगली सुबह से ऐसा उत्सव शुरू होता है, मानो नंदबाबा के घर आज ही लाला पैदा हुए हों। यही वजह है कि ब्रज में एक कहावत सी बन गई है ‘नंदोत्सव हो तो नंदगांव जैसा’। इस बार नंदगांव में पांच सितंबर को जन्माष्टमी और छह सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। नंदभवन से लेकर नंदगांव की गलियों तक उत्सव का रंग दिखाई देगा। लेकिन इस उत्सव की खासियत सिर्फ भीड़, सजावट और उल्लास नहीं है। यहां आज भी जन्मोत्सव की कई परंपराएं उसी भाव से निभाई जाती हैं, जैसे सदियों पहले नंदबाबा ने अपने लाल के जन्म पर निभाई हों। जन्माष्टमी के दिन नंदभवन में मां यशोदा को प्रसूता के समान आहार दिया जाता है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर में उल्लास छा जाता है। जन्म के बाद शीत से बचाने के लिए सोंठ-धनिया की पंजीरी दी जाती है। मां यशोदा के मस्तक और पेट पर बांधा जाने वाला कपड़ा भी इस परंपरा का हिस्सा है, जो छठी तक बंधा रहता है। रात केवल जन्म की नहीं होती। भजन-संध्या, कृष्ण वंशावली का बखान और ढांढ-ढांढिन लीला श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखती है। वैदिक मंत्रों के बीच होने वाला गुप्त अभिषेक इस उत्सव को और रहस्यमय बना देता है। इस दौरान लाला के केवल कटि-काछनी धारण किए दर्शन होते हैं।
*कान्हा के जन्मोत्सव पर हुई बूंदा-बांदी, उमस से मिली राहत*
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उल्लास के बीच शुक्रवार देर शाम अचानक मौसम ने करवट ली और बारिश शुरू हो गई। दिनभर उमस और गर्मी से बेहाल श्रद्धालुओं को बारिश ने राहत दी। बारिश की फुहारों के साथ ही मौसम सुहाना हो गया और वातावरण में ठंडक घुल गई। हालांकि जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए मंदिरों की ओर जा रहे श्रद्धालुओं को अचानक हुई बारिश के कारण परेशानी भी उठानी पड़ी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के चलते सुबह से ही मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी। मंदिरों और प्रमुख बाजारों में शाम होते-होते भीड़ और बढ़ गई। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झलक पाने और मंदिरों में दर्शन करने के लिए कतारों में लगे थे। इसी बीच देर शाम आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। अचानक बारिश होने से सड़क और बाजारों में मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग बारिश से बचने के लिए आसपास की दुकानों, प्रतिष्ठानों, मंदिरों के बरामदों और अन्य सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने छाते और बरसाती का सहारा लिया, जबकि बड़ी संख्या में लोग बारिश में भीगते हुए ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। बारिश के बावजूद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश थमने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिरों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। मंदिरों में जन्मोत्सव की तैयारियां जारी रहीं और श्रद्धालुओं के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य को लेकर उत्साह बना रहा। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने से दिनभर की गर्मी और उमस से लोगों को काफी राहत मिली। जन्माष्टमी के मौके पर हुई बारिश ने शहर के वातावरण को भी भक्तिमय उत्सव के साथ-साथ सुहाना बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि कान्हा के जन्मोत्सव पर हुई बारिश ने गर्मी से राहत देकर उत्सव की खुशी को और बढ़ा दिया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अपने आराध्य के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए मथुरा पहुंच रहे श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शाम ढलते ही शहर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंचकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन के लिए कतार में शामिल हो रहे हैं। रात्रि 12 बजते ही श्री कृष्ण का अभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है और कई स्थानों पर जाम के हालात बने हुए हैं। भूतेश्वर चौराहा, जन्मभूमि लिंक रोड, भरतपुर गेट, डीग गेट, गोविंद नगर तिराहा और महाविद्या कॉलोनी समेत कई प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है। जन्मभूमि की ओर जाने वाले रास्तों पर पैदल श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाथों में पूजा सामग्री और माथे पर श्रीकृष्ण की भक्ति का रंग लिए श्रद्धालु जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं। शहर का माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो गया है। जन्माष्टमी के मुख्य आयोजन और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। भीड़ को देखते हुए पुलिस और यातायात पुलिस की टीमें प्रमुख मार्गों एवं चौराहों पर यातायात व्यवस्था संभालने में जुटी हैं। देर रात तक श्रद्धालुओं के मथुरा पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीबांकेबिहारी के समक्ष काटा जाएगा केक*
श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात को कान्हा का जन्मोत्सव इस बार खास अंदाज में मनाया जाएगा। आधी रात को विशेष रूप से तैयार केक आराध्य के समक्ष अर्पित कर मंदिर के सेवायत गोस्वामियों द्वारा काटा जाएगा। ठाकुरजी के लिए केक आगरा से बनकर आ रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीबांकेबिहारी के लिए आगरा की ब्रज रसायन फर्म द्वारा 21 किलो का केक तैयार कराया जा रहा है। इसमें सभी प्रकार की मेवा और पाग में उपयोग होने वाली खाद्य वस्तुओं का उपयोग किया जाएगा। मंदिर के सेवायत फ्रेंकी गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी के जन्मोत्सव पर आधी रात को उनके समक्ष सेवित कर केक काटा जाएगा। उसके बाद प्रसाद रूप में वह भक्तों में बांटा जाएगा। आगरा के श्रद्धालु द्वारा ठाकुरजी के लिए केक का ऑर्डर एक माह पहले ही दिया गया। उन्होंने बताया कि ठाकुरजी के गर्भगृ़ह का पर्दा लगाकर उनका पंचामृत, केसर एवं उत्तराखंडी से मंगाई गई जड़ी बूटियों से महाभिषेक रात के 12 बजे किया जाएगा। इसके बाद नवीन पोशाक धारण कराई जाए। बाल रूप में ठाकुरजी का अनुपम शृंगार किया जाएगा। सिर पर ठाकुरजी मोरपंखी धारण करेंगे। इसके बाद रात 1़ 55 बजे वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती की जाएगी। फ्रेंकी गोस्वामी ने बताया कि उनके परिवार को 31 साल के बाद ठाकुरजी की मंगला आरती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसलिए इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुरजी का खास अंदाज में जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
*मथुरा में श्रद्धालुओं का हुजूम, 27 मंचों पर दिख रही मिनी भारत की झलक*
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कन्हैया की जन्मस्थली मथुरा में श्रीकृष्णोत्सव 2026 का अलौकिक उल्लास चरम पर पहुंच गया है। ब्रज की पावन भूमि पर इस बार भक्ति, भव्यता और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जिसने संपूर्ण मथुरा नगरी को कृष्णमय कर दिया है। लाखों की संख्या में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु इस दिव्य उत्सव के साक्षी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा श्रद्धालुओं को ब्रज संस्कृति और भारतीय लोक कलाओं से रूबरू कराने के लिए पूरे मथुरा शहर में 27 सुसज्जित मंच तैयार किए गए हैं। इन मंचों पर दिन-रात चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरी नगरी को उत्सव के रंग में रंग दिया है। कलाकार अपनी-अपनी क्षेत्रीय पारंपरिक वेशभूषा में ढोल, मंजीरे, खड़ताल और पारंपरिक लोक वाद्यों की थाप पर शानदार नृत्यों की प्रस्तुति दे रहे हैं।
*मंगला आरती में शामिल होंगे 600 श्रद्धालु*
वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में साल में केवल एक बार होने वाली मंगला आरती के दर्शन के लिए इस बार भी देशभर से श्रद्धालु वृंदावन पहुंच रहे हैं। कान्हा के जन्म के बाद रात 1:45 मिनट पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी की आरती होगी। आरती के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वहीं हाईपावर्ड कमेटी ने मंदिर के अंदर पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या निश्चित की है। हाईपावर्ड कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि इस बार भी मंगला आरती में 600 लोगों को मंदिर के अंदर प्रवेश मिलेगा। सेवायतों से बात करने के बाद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को संख्या मंदिर के अंदर सीमित की है। पुलिसकर्मियों को भी मंदिर के अंदर जाने के लिए पास जारी किए गए है। जिन पर पास नहीं होंगे उनको आरती के समय प्रवेश नहीं मिलेगा।
*श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दर्शन को पहुंच रहे दूर-दराज से श्रद्धालु*
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर कान्हा की नगरी मथुरा कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आ रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। चारों ओर ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं के चेहरे पर कान्हा के दर्शन की उत्सुकता और मन में भक्ति का भाव दिखाई दे रहा है। जन्माष्टमी पर मथुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग तरह की भक्ति और परंपराओं के नजारे देखने को मिल रहे हैं। हरियाणा के होडल से श्रद्धालुओं का एक समूह भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचा। समूह के सदस्यों ने बताया कि वे हर वर्ष जन्माष्टमी पर मथुरा आते हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करना उनके लिए विशेष आस्था का विषय है। श्रद्धालुओं ने बताया कि जन्मभूमि में कान्हा के दर्शन करने के बाद वे दही-हांडी की मटकी अपने साथ होडल लेकर जाते हैं। वहां मंदिर में विशेष आयोजन कर इसी मटकी को फोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मथुरा की पावन धरती से दही-हांडी की मटकी ले जाकर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी इस परंपरा को निभाना उनके लिए आस्था और आनंद का विषय है। होडल से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि मथुरा आकर जन्मभूमि में कान्हा के दर्शन करने का अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आने से ऐसा लगता है मानो स्वयं कान्हा की बाल लीलाओं के बीच पहुंच गए हों। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा की गलियों से लेकर मंदिरों तक भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु कान्हा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं और जन्मभूमि के दर्शन को अपनी यात्रा का सबसे बड़ा सौभाग्य मान रहे हैं।
जन्माष्टमी पर बांकेबिहारी मंदिर में सुरक्षा के चाक-चाैबंद इंतजाम किए गए हैं। पुलिसकर्मियों के साथ पीएसी की भी तैनाती की गई है। जिससे श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के दर्शन में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। अधिकारियों ने भी शुक्रवार को बांकेबिहारी मंदिर में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर श्रद्धालुओं और परिक्रमार्थियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। शुक्रवार को डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने वृंदावन में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।डीएम और एसएसपी ने श्री बांकेबिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर तथा आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, सफाई, पेयजल, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था और जूता घर सहित श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं की स्थिति देखी। अधिकारियों ने श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों के साथ मंदिर को जोड़ने वाली प्रमुख गलियों का भी निरीक्षण किया। जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए भीड़ नियंत्रण और आवागमन को सुगम बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। डीएम और एसएसपी ने अधिकारियों को व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
*जन्माष्टमी की रात बांकेबिहारी मंदिर में खास मंगला आरती...1:45 बजे ठाकुरजी के होंगे दर्शन*
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर कान्हा के जन्म के बाद होने वाली मंगला आरती आज रात 1:45 बजे होगी। वर्ष में विशेष अवसर पर होने वाली यह मंगला आरती श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास मानी जाती है। मान्यता है कि "जिसने की मंगला, वो कभी न हो कंगला।" मंगला आरती के लिए मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं, ऐसे में मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। रात में होने वाली मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए ठाकुरजी के दर्शन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। मंगला आरती में शामिल होने और ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु वृंदावन पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की अभेद्य सुरक्षा, तीन जोन और 17 सेक्टर में बंटा क्षेत्र
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्र को तीन जोन और 17 सेक्टर में विभाजित किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है।
*जन्मस्थान के पास बना खोया-पाया केंद्र*
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ में बिछुड़े लोगों को उनके परिजन से मिलाने के लिए जन्मस्थान के पास वाहन पार्किंग परिसर में खोया-पाया केंद्र स्थापित किया गया है।
कान्हा की झलक को बेताब श्रद्धालु
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार सुबह से ही जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न राज्यों और दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े नजर आए। जन्मभूमि परिसर के आसपास श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दिया। भक्तों में कान्हा के जन्म की एक झलक पाने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भगवान के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। भीड़ और लंबी कतार के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों से माहौल भक्तिमय है। मध्य रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही जन्मभूमि परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और महाभिषेक किया जाएगा। जन्म के दर्शन के लिए अधिक संख्या में भक्त साक्षी बनेंगे।
*मंदिर में इन वस्तुओं के साथ नहीं मिलेगा प्रवेश*
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार का सामान ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। जन्मभूमि में मोबाइल, कैमरा, रिमोट की रिंग, थैला, माचिस, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, चाकू, ब्लेड आदि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान अपने साथ मंदिर में प्रवेश करते समय ले जाने पर रोक है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने इसके लिए जन्मभूमि के सभी संपर्क मार्गों पर सामान घर बनाए हैं। यहां श्रद्धालु सामान जमाकर कूपन प्राप्त कर सकते हैं। मंदिर से निकलने के बाद सामानघर में कूपन देकर अपना सामान वापस प्राप्त कर सकते हैं।
*जन्मस्थान पर ये होंगे कार्यक्रम*
जन्मास्थान पर शुक्रवार सुबह 5:30 बजे मंगला दर्शन, 8 बजे दिव्य पंचामृत अभिषेक, 9:30 बजे पुष्पांजलि कार्यक्रम, दोपहर 1 से 3 बजे लीला मंच पर भजन-गायन, रात 11 बजे गणेश वंदना, गर्भ-स्तुति व सहस्रार्चन, मध्यरात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण प्राकट्य दर्शन व आरती, 12:10 से 12:30 बजे पयोधर महाभिषेक, 12:30 से 12:40 बजे जन्म-महाभिषेक, 12:45 से 12:50 बजे श्रृंगार आरती, 1:55 से 2 बजे शयन आरती होगी।
*30 मिनट तक जन्मस्थान परिसर में रहे सीएम योगी*
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री करीब 30 मिनट तक जन्मस्थान परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
मथुरा में जन्माष्टमी के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आप सभी की चिंता कृष्ण कन्हैया करेंगे। आप अपने देश, समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहें। प्रदेश की डबल इंजन सरकार आपके साथ मिलकर काम करेगी। हमने इसके लिए व्यापक चर्चा की है। बांके बिहारी मंदिर, बरसाना, वृंदावन, गोवर्धन में तेजी से विकास हो रहा है और भी होगा। ये इसलिए संभव हुआ है कि प्रदेश में आपकी भावनाओं के समझने वाली सरकार है। यह वो सरकार है को कृष्ण, राम और भगवान विश्ववनाथ के प्रति आस्था रखती है। जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, वे क्या आपकी आस्था की कद्र करेंगे। वे समाज में विश्वाषघात और जहर घोलने का काम करेंगे, जिससे विरोधी तत्वों के हौसले बुलंद हों। बहन बेटियों की सुरक्षा में वे सेंध लगा सकें और किसानों व हस्तशिल्पियों की कमाई पर डाका डाल सके। लेकिन इन सबके मंसूबों पर प्रदेश सरकार ने पानी फेर दिया है।
मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आराध्य का आशीर्वाद लिया।
रोशनी से नहाये इन मंदिरों की आभा हर किसी को आकर्षित कर रही थी। विद्युत झालरों से सजे इन मंदिरों को देख लोगों के कदम वहीं थम गए। उधर, सेवायत गोस्वामी उल्लास के साथ बधाई गुनगुनाते नजर आए। वृंदावन के प्राचीन सप्त देवालयों को शिखर से लेकर चौखट तक रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया है। मंदिर के अंदर चौक और गर्भगृह को देशी-विदेशी सुगंधित पुष्पों और गुब्बारों से सजाया गया है।
*श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य उत्सव*
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य उत्सव का आयोजन होगा। यहां शुक्रवार सुबह 5:30 बजे से रात्रि 1:30 बजे तक निरंतर प्रवेश रहेगा। वहीं, ब्रज के सभी छोटे-बड़े मंदिर और चौराहों को भी सजाया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर पुलिस, पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक 50 लाख से अधिक श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव के गवाह बनेंगे। लल्ला के स्वागत में पूरा ब्रज ही नहीं देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु आतुर हैं। मथुरा-वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे कन्हैया के जन्म लेते ही... हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की जयघोष गूंजने लगेगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान, ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, प्रेम व इस्कॉन मंदिर में दर्शन के लिए बृहस्पतिवार को ही हजारों लोग उमड़ पड़े और यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
आज घर-घर जन्म लेंगे कृष्ण कन्हाई, गूंजेगी मंगल बधाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर यह भावना समूचे ब्रज को झंकृत किए हुए है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास पूरे ब्रज में हिलोरें ले रहा है। हर ब्रजवासी अपने कान्हा के आगमन का पलक-पावड़े बिछाकर इंतजार कर रहा है। उनके स्वागत के लिए ब्रज स्वर्ग सा सज गया है। जगह-जगह तोरणद्वार और रंग बिरंगी रोशनी से शहर के समूचे मार्ग और चौराहे यहां तक की गलियां तक रोशन हैं। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे घर-घर कन्हाई जन्म लेंगे तो हर घर में मंगल बधाई गीत गूजेंगे। उनके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ब्रज में आ चुके हैं। यह सिलसिला निरंतर जारी है।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास चरम पर है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए ब्रज पहुंच चुके हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान समेत शहर के प्रमुख मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से जगमगा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री सबसे पहले गो-पूजन करेंगे और इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेंगे।
कृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, हर तरफ ‘राधे-राधे’
Source: Dastak Media