अमेरिका-ईरान के बीच हुए कथित शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इस डील में ईरान में भारी निवेश, फंड रिलीज और तेल प्रतिबंधों में ढील जैसी शर्तों की चर्चा है, लेकिन इसके तुरंत बाद इजराइल ने इस समझौते पर कड़ा विरोध जताया है। इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजराइल कोई “बनाना रिपब्लिक” नहीं है और न ही कोई कमजोर देश है जो बाहरी फैसलों के आगे झुक जाए। उन्होंने साफ कहा कि इजराइल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और अमेरिका-ईरान के बीच हुआ कोई भी समझौता उसे बाध्य नहीं कर सकता। काट्ज़ ने यह भी संकेत दिया कि जब तक यह अंतरिम समझौता पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, तब तक इजराइल लेबनान में अपने कब्जे वाले इलाकों से पीछे नहीं हटेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में कई रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण बनाए रखा है और वह इसे फिलहाल छोड़ने के मूड में नहीं है। काट्ज़ ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इजराइल पर किसी तरह का हमला हुआ, तो उसका जवाब “बहुत बड़ी ताकत” से दिया जाएगा। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने भी इस समझौते पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इजराइल किसी भी बाहरी दबाव में काम नहीं करेगा और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले हुए कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बाद इजराइल को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए इस बार सतर्क रहना जरूरी है। “बनाना रिपब्लिक” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन देशों के लिए किया जाता है जो राजनीतिक रूप से अस्थिर हों और जिनकी अर्थव्यवस्था बाहरी ताकतों पर निर्भर हो। इजराइली नेताओं ने इस शब्द को खारिज करते हुए इजराइल की संप्रभुता और सुरक्षा नीति पर जोर दिया है।