भारत सरकार अब पारंपरिक एलपीजी (LPG) सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए देशव्यापी अभियान चला रही है। जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हाल के अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर ईरान-अमेरिका तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े संकट के कारण भारत के ऊर्जा आयात पर असर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा और करीब 70 फीसदी कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है। ऐसे में सरकार घरेलू गैस आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए पीएनजी के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दे रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान करें, जिनके पास पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को नोटिस भेजा जा सकता है, यदि उन्होंने पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद भी अपना एलपीजी सिलेंडर संबंधित गैस एजेंसी को वापस नहीं किया है। सरकार का कहना है कि दोहरे कनेक्शन की वजह से अनावश्यक सब्सिडी और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, तेल कंपनियों को प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 690 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण मंत्रालय ने उन क्षेत्रों में, जहां गैस पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है, लोगों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और एलपीजी पर निर्भरता कम करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत तेल कंपनियों और गैस वितरण एजेंसियों को डबल कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और आवश्यकतानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।