पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने विधानसभा में रितब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में दी गई मान्यता पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही रितब्रता बनर्जी फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की गई है। यह विवाद टीएमसी के भीतर बढ़ती बगावत के बीच सामने आया है। पार्टी के करीब 60 विधायकों ने अलग गुट बनाकर नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके अलावा कई लोकसभा और राज्यसभा सांसद भी पार्टी से दूरी बना चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा रितब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले को ममता बनर्जी गुट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या विधानसभा अध्यक्ष किसी विधायक को उसकी मूल राजनीतिक पार्टी की इच्छा के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे सकते हैं या इस मामले में संबंधित दल की आधिकारिक राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि अदालत ने फिलहाल स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। पूरा विवाद कथित फर्जी हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव से जुड़ा है। आरोप है कि टीएमसी विधायक दल की बैठक में पारित बताए गए प्रस्ताव में कई हस्ताक्षर संदिग्ध थे। रितब्रता बनर्जी और अन्य बागी विधायकों ने इस पर आपत्ति जताई और इसे जाली दस्तावेज बताया। इसके बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया, लेकिन बागी विधायकों ने अलग गुट बनाकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। इसी गुट को मान्यता मिलने के बाद रितब्रता बनर्जी नेता प्रतिपक्ष बने, जिसे लेकर अब कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी है।