प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में संभावित अल-नीनो (El Nino) प्रभाव को देखते हुए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इस चेतावनी का उद्देश्य आगामी मानसून सीजन में संभावित जलवायु जोखिमों से समय रहते निपटना है। अल-नीनो की स्थिति के कारण इस वर्ष भारत में मानसून कमजोर रहने और सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने भी हाल ही में संकेत दिया है कि अल-नीनो की स्थिति अभी बनी हुई है और इसके 2026-27 की सर्दियों तक और मजबूत होने की संभावना है। इसके चलते भारत में भीषण गर्मी, सूखा और फसल उत्पादन में गिरावट जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 11 जून को नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सभी 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक का विषय “विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास” था। बैठक में पीएम मोदी ने राज्यों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के अवसरों का लाभ उठाने, जल संरक्षण को मजबूत करने और विकास के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की विकास यात्रा दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। साथ ही उन्होंने अल-नीनो से जुड़ी संभावित चुनौतियों को गंभीरता से लेते हुए पहले से तैयारी करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और भारत में बारिश कम हो सकती है। इसका सीधा असर खेती, खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसी कारण केंद्र सरकार ने राज्यों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित संकट को कम किया जा सके।