भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एजेंसी ने तमिलनाडु स्थित ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में अपने अगली पीढ़ी के सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड का सफल ‘हॉट टेस्ट’ पूरा किया। यह परीक्षण इंजन की निर्धारित क्षमता के लगभग 88 प्रतिशत यानी 175 टन थ्रस्ट स्तर पर किया गया, जो भविष्य के भारी प्रक्षेपण मिशनों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। ISRO के अनुसार, यह परीक्षण 24 जून को किया गया, जिसमें इंजन ने निर्धारित समय तक स्थिर और संतुलित प्रदर्शन किया। इससे पहले इसी इंजन के 47 प्रतिशत और 60 प्रतिशत थ्रस्ट स्तर पर भी सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। लगातार मिल रही सफलता से अब वैज्ञानिकों का भरोसा बढ़ा है कि जल्द ही इंजन का 200 टन फुल-थ्रस्ट टेस्ट भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा। यह सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम भारत के सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल LVM3 के मौजूदा L110 कोर स्टेज की जगह लेने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इसमें 2,000 किलोन्यूटन क्षमता वाला अत्याधुनिक SE2000 इंजन लगाया जाएगा, जिससे रॉकेट की पेलोड क्षमता बढ़ेगी और मिशनों की कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। नई तकनीक में लिक्विड ऑक्सीजन और केरोसिन आधारित ईंधन का उपयोग किया जाएगा, जिसे पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती माना जाता है। ISRO की यह सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है और भविष्य के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।