बीजेपी के वरिष्ठ नेता और इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने कोलंबो में आयोजित एक क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में अपनी मौजूदगी को लेकर सामने आई रिपोर्टों का खंडन किया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनकी भागीदारी भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही ‘ट्रैक-2’ कूटनीति का हिस्सा थी। हालांकि, राम माधव ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि यह “पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल दो दिवसीय क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में शामिल हुए थे और किसी भी बंद कमरे में हुई रणनीतिक चर्चा या भारत-पाकिस्तान के बीच किसी विशेष बैठक का हिस्सा नहीं थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई, जिसमें राजनेता, पूर्व सैन्य अधिकारी और पूर्व राजनयिक शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर से राम माधव, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे और पूर्व भारतीय राजनयिक रुचि घनश्याम मौजूद थे। वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व राजनयिक सज्जाद हैदर खान, पूर्व मंत्री शेरी रहमान और रिटायर्ड मेजर जनरल इसफंदियार अली खान पटौदी ने भाग लिया था। इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि राम माधव और पूर्व सेना प्रमुख नरवणे कोलंबो में एक ब्रिटिश थिंक टैंक द्वारा आयोजित भारत-पाक ‘ट्रैक-2’ बैठक का हिस्सा थे। इसके जवाब में राम माधव ने कहा कि यह कार्यक्रम लंदन स्थित IISS का वार्षिक ‘साउथ एशिया डायलॉग’ था, न कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई ट्रैक-2 वार्ता। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान सहित कई देशों के विशेषज्ञ और विद्वान शामिल हुए थे।